08 जनवरी 2009

चेहरा


चेहरे पर ना जाओ
हर चेहरा कुछ न कुछ बोलता है
कहीं मासूमियत
कहीं पर सुन्दरता
तो किसी पर मृदुल हसीं छलकती है
कभी कुछ छुपा ले
कभी कोई भी राज ना खोले
चेहरे पर ना जाओ
हर चेहरा कुछ न कुछ बोले
मन को ढापें ऐसे
जैसे खूब कोहरे से
सब कुछ छुप जाए
दिखे तो दिखे सब, जाने तो
लेकिन फिर भी ना जान पाये
चेहरे पर ना जाओ
हर चेहरा कुछ न कुछ बोले
कहते हैं, है मन का आईना
लेकिन जानो, आईना कभी भी सच्चाई नही है
देखो कभी ठग ले, दे कभी धोखे भी
ठोकर खाकर सम्भले तो ठीक
वरना राह मे कई और चेहरे मिल जायेंगे
चेहरे पर ना जाओ
हर चेहरा कुछ न कुछ बोले

7 टिप्‍पणियां:

creativekona ने कहा…

Menaka ji,
Bahut bhav poorna kavitaon se apne naye sal kee shuruat kee hai.Apkee chehra kavita padhkar vo geet yad aa gaya...Lakh chhupao chhup na sakega aslee naklee chehra.....any way.Apkee donon hee kavitayen bhavpoorna aur aaj ke hisab se uchit hain.meree badhai.
Nav varsh kee hardik mangalkamnayen is ummeed ke sath ki age bhee aisee hee achchhee rachnayen padhne ko milengee.
Hemant Kumar

राज भाटिय़ा ने कहा…

चेहरे पर ना जाओ
हर चेहरा कुछ न कुछ बोले
बहुत सुंदर कविता.
धन्यवाद

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

poori nazam bahut sundar ban padi hai .. bahut bhaavpoorn abhivyakti hai ..

aapko bahut badhai ..


vijay
Pls visit my blog for new poems:
http://poemsofvijay.blogspot.com/

JHAROKHA ने कहा…

Menaka ji,
Apne chehre ko bahut achchhee tarah vyakkhyayit kiya hai .vastav men aj kisi ka asli chehra pahchan pana bahut kathin hota hai.achchhee kavita ke liye badhai.
Poonam

अवनीश एस तिवारी ने कहा…

भाव अच्छे हैं | लेकिन तो सरंचना ( structure ) / शिल्प होती है , पूरी की पूरी ठीक नही बन पाई है |

दोहरा लो, जांच लो और कमी को हटा revise कर लो | लिखते रहिये |
बधाई |


अवनीश तिवारी

आनंदकृष्ण ने कहा…

आपका ब्लॉग देखा. बहुत अच्छा लगा. आपके शब्दों को नित नई ऊर्जा मिलती रहे और वे जन साधारण के सरोकारों का समर्थ और सार्थक प्रतीकन करें, यही कामना है.
कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर भी पधारने की कृपा करें-
http:www.hindi-nikash.blogspot.com
सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर.

chopal ने कहा…

भावपूर्ण प्रस्तुति